Chamatkari vidya - Guru kreepa kewalam sampoorn sidhhi

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Monday, 6 August 2018

Chamatkari vidya

लौंग से सिर्फ सेहत ही नहीं किस्मत भी संवरती है, जानिए, 6 चमत्कारिक टोटके ...

लौंग का प्रयोग आमतौर पर सेहत और स्वाद के लिए किया जाता है लेकिन पूजा के कामों में भी लौंग का भरपूर उपयोग किया जाता है। तंत्र मंत्र में भी इसके चमत्कारी फायदे होते हैं,जानिए 6 अनूठे टोटके....

बिगड़े काम बनाए लौंग :अगर किसी जरूरी काम में सफलता चाहते हैं तो एक नींबू के ऊपर 4 लौंग गाड़ दें और ॐ श्री हनुमते नम: मंत्र का 21 बार जाप कर उस नींबू को अपने साथ ले कर जाएं। हनुमानजी ने चाहा तो आपका काम बन जाएगा।

दूसरा उपाय...

आरती में लौंग :सुबह पूजा के बाद आरती करते समय दीपक में 2 लौंग डाल कर आरती करें या कपूर में दो फूल वाले लौंग डालकर आरती करें। आपके हर काम सुगमता से होंगे और किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आएगी।

तीसरा उपाय...

इच्छा के विरूद्ध कार्य करना पड़ रहा हो तो: कई बार व्यक्ति को किसी कारणवश या मजबूरी में अपनी इच्छा के विरुद्ध कोई कार्य करना पड़ता है। ऐसे में इसका नुकसान भी उठाना पड़ता है। यदि ऐसा है तो आप कपूर और एक फूल वाली लौंग एक साथ जलाकर दो-तीन दिन में थोड़ी-थोड़ी खा लें। आपकी इच्छा के विपरीत कार्य होना बंद हो जाएगा।

चौथा उपाय...

रूके हुए कार्यों की सिद्धि के लिए यह प्रयोग बहुत ही लाभदायक है। गणेश चतुर्थी को गणेश जी का ऐसा चित्र घर या दुकान पर लगाएं, जिसमें उनकी सूंड दाईं ओर मुड़ी हुई हो। इसकी आराधना करें। इसके आगे लौंग तथा सुपारी रखें। जब भी कहीं काम पर जाना हो, तो एक लौंग तथा सुपारी को साथ ले कर जाएं, तो काम सिद्ध होगा। लौंग को चूसें तथा सुपारी को वापस ला कर गणेश जी के आगे रख दें तथा जाते हुए कहें 'जय गणेश काटो कलेश।'

पांचवां उपाय...

धनलाभ हेतु :कच्ची धानी के तेल के दीपक में लौंग डालकर हनुमानजी की आरती करें। अनिष्ट दूर होगा और धन भी प्राप्त होगा।

छठा उपाय...

शत्रुनाशक उपाय :सात बार बजरंग बाण का पाठ करें तथा हनुमानजी को लड्डू का भोग लगाएं और पांच लौंग पूजा स्थान में देशी कर्पूर के साथ जलाएं। फिर भस्म से तिलक करके बाहर जाएं। यह प्रयोग आपके समस्त शत्रुओं को परास्त कर देगा।
अपने नक्षत्र के अनुकूल वृक्ष लगाने से, उस वृक्ष की पूजा करने से अथवा उनमें पानी देने से, उनकी परिक्रमा करने, इनका प्रतिदिन दर्शन करने से नक्षत्र जनित दोष दूर होते हैं एवं भाग्य में वृद्धि होती है ।

1. अश्विनी : केला, आक, धतूरा
2. भरणी : केला, आंवला
3. कृतिका : गूलर
4. रोहिणी : जामुन
5. मृगशीर्ष : खैर
6. आर्द्रा : आम, बेल
7. पुनर्वसु : बांस
8. पुष्य : पीपल
9. आश्लेषा : नागकेशर, चंदन
10. मघा : बरगद
11. पू.फा. : ढाक (पलास)
12. उ.फा. : बड़, पाकड़
13. हस्त : रीठा
14. चित्रा : बेल
15. स्वाती : अर्जुन
16. विशाखा : नीम, विकंक
17. अनुराधा : मौलसिरी
18. ज्येष्ठा : रीठा
19. मूल : राल वृक्ष
20. पू.षा. : मौलसिरी, जामुन
21. उ.षा. : कटहल
22. श्रवण : आक
23. धनिष्ठा : शमी/सेमर
24. शतभिषा : कदम्ब
25. पू.भा. : आम
26. उ.भा. : पीपल, सोनपाठा
27. रेवती : महुआ

: आदेश आदेश
प्रेत बाधा नाशक मंत्र
ओम नमो नृसिंहाय हिरण्यकशिपु वक्ष विदारणाय , त्रिभवन व्यापकाय भूत पिशाच शाकिनी डाकिनी कीलनोन्मूलनाय स्यंवाद भव समस्त दोषान् हन हन सर सर ,.चल चल , कम्प कम्प , मथ मथ , हुं फट् हुं फट् ठः ठः महारुद्र जापियत स्वाहा
विधि
यह मंत्र सभी प्रकार की प्रेत बाधा दूर करने का यह सशक्त प्रयोग इसका प्रयोग के तहत शनिवार की रात्रि में मंत्र को 144 बार जप कर सिद्ध कर लें इसके बाद इस मंत्र के अधिष्ठाता देवता भगवान नरसिंह का ध्यान करते हुए इस मंत्र को 7 बार पढ़कर मोरपंखी से पीड़ित को झाड़ दें इससे प्रेत बाधा दूर हो जाएगी

6।। तारा ।।

ॐ आदि योग अनादि माया जहाँ पर ब्रह्माण्ड उत्पन्न भया । ब्रह्माण्ड समाया आकाश मण्डल तारा त्रिकुटा तोतला माता तीनों बसै ब्रह्म कापलि, जहाँ पर ब्रह्मा विष्णु महेश उत्पत्ति, सूरज मुख तपे चंद मुख अमिरस पीवे, अग्नि मुख जले, आद कुंवारी हाथ खण्डाग गल मुण्ड माल, मुर्दा मार ऊपर खड़ी देवी तारा । नीली काया पीली जटा, काली दन्त में जिह्वा दबाया । घोर तारा अघोर तारा, दूध पूत का भण्डार भरा । पंच मुख करे हां हां ऽऽकारा, डाकिनी शाकिनी भूत पलिता सौ सौ कोस दूर भगाया । चण्डी तारा फिरे ब्रह्माण्डी तुम तो हों तीन लोक की जननी ।

ॐ ह्रीं स्त्रीं फट्, ॐ ऐं ह्रीं स्त्रीं हूँ फट्

विधि - विस्तार  ---

   अति उग्र साधना हैं गुरु के सानिध्य में रहकर साधना करे ,  इस साधना से अगर किसी को हानि होती हैं तो उसके लिए प्रकाशक जिम्मेदार नहीं हैं।

देह रक्षा मंत्र-

||जीवन मरण है तेरो हात ,भैरो वीर तू हो

जा मेरे साथ,रखियो वीर तुम भक्त की लाज , बिगाड़ न पावे कोई मेरो काज,दुहाई लूना चमारिन की दुहाई कामख्या माई की दुहाई गौरा पार्वती की चौरासी सिद्धो को आदेश आदेश आदेश ||

इस के बाद आसन किलन मंत्र का जाप 11 बार करे और आसन का पुजन करे.

आसन किलन मंत्र-

||धरती किलूं पाताल किलूं , किलूं सातो आसमान , चौरासी सिद्धों के आदेश से आसन किलूं ना हो अपमान,लूना चमारिन की आन है गुरु गोरख की यह शान है||

इस के बाद एक लोहे का किल लेकर

अपने चारो और गोल घेर बना ले जिससे आपका सुरक्षा होगा.

घेर मंत्र-

||जो घेड़ा तोड़ घर मह घुसे ;रक्त काली उसका रक्त चुसे,दुहाई माँ कामख्या की,दुहाई माँ कामख्या की,दुहाई माँ कामख्या की||

इस के बाद दशो दिशाओं को बांध दे ताकी साधना मे कोई बाधा उत्पन्न ना हो और इसके लिये मंत्र बोलते हुए अष्टगंध से मिश्रित चावल को दसो दिशा मे एक-एक बार मंत्र बोलते हुए छीडकना है.

दिशा बांधने का मंत्र-

||ॐ वज्र क्रोधाय महा दन्ताय दश दिशों बंध बंध हुं फट स्वाहा||

अब एक आसन बिछा के उसके उपर एक बाजोट रखे और बाजोट के ऊपर एक थाली की ऊपर नौ पान की पत्ते और पत्ते की उपर नौ दीपक,बिच में एक गोल पात्र जिसमे धुनी जलाया जा सके ठीक वैसा ही करना है. पान के पत्ते पे एक एक सुपारी लौंग, इलाइची,पतासे और एक रूपया का सिक्का रखे दे,दीपक में घी या मीठा तेल डाल कर धूप बत्ती लगा के रखे बीच में धुनी जलादे और धुनी जलाते वक्त यह मंत्र पढे.

धुनी मंत्र-

|| धुनी धरे-धुआं करे,,तोह नव नाथ पधारे जो नाथ ना पधारे तोह शिव की जटा टूट भूमि में पड़े अदेश आदेश नव नाथों को आदेश ||

अब नौ दीपक को एक एक श्लोक पढ़ते हुए एक एक कर जलाये-

श्लोक 1.

आदिनाथ आकाश सम,सूक्ष्म रूप ॐकार तिन लोक में हो रहा,अपनी जय जय कार.

अभिचार-कर्म नाशक मंत्र-

ll राम नाम लेकर हनुमान चले,कहा चले चौकी बिठाने चले,चौकी बिठाके रात की विद्या दिन की विद्या चारो प्रहर की विद्या काटे हनुमान जती,मंत्र बाँध तंत्र बाँध जन्त्र बाँध रगड के बाँध,मेरी आण मेरे गुरू की आण,छु वाचापुरी ll

मंत्र का रोज मंगलवार से 108 बार जाप 21 दिन करना है.शाबर मंत्रो मे बाकी नियम नही होते है.मंत्र सिद्ध होगा & बभुत पर मंत्र को 11 बार पढकर 3 फुंक लगाये.अब बभुत को जिसपर तंत्र बाधा हो उसके माथे पर लगा दे तो पीडित के कष्ट दुर हो जायेगा.इस मंत्र से चौकी भी लगता है,बाधा भी कटता है और बंधन भी लगाया जाता है.यह हनुमत मंत्र मुझे गुरूमुख से प्राप्त हुआ है जो इस दुनिया के किसी भी किताब मे नही है.इस मंत्र से झाडा भी लगा सकते है और पानी मे पढकर भी दिया जा सकता है.

ऊँ श्री महालक्ष्मये नमः
1. मूलाधार चक्र :
यह शरीर का पहला चक्र है। गुदा और लिंग के बीच चार पंखुरियों वाला यह "आधार चक्र" है। 99.9% लोगों की चेतना इसी चक्र पर अटकी रहती है और वे इसी चक्र में रहकर मर जाते हैं। जिनके जीवन में भोग, संभोग और निद्रा की प्रधानता है, उनकी ऊर्जा इसी चक्र के आसपास एकत्रित रहती है।
मंत्र : "लं"
कैसे जाग्रत करें : मनुष्य तब तक पशुवत है, जब तक कि वह इस चक्र में जी रहा है.! इसीलिए भोग, निद्रा और संभोग पर संयम रखते हुए इस चक्र पर लगातार ध्यािन लगाने से यह चक्र जाग्रत होने लगता है। इसको जाग्रत करने का दूसरा नियम है यम और नियम का पालन करते हुए साक्षी भाव में रहना।
प्रभाव : इस चक्र के जाग्रत होने पर व्यक्ति के भीतरवीरता, निर्भीकता और आनंद का भाव जाग्रत हो जाता है। सिद्धियां प्राप्त करने के लिए वीरता, निर्भीकता और जागरूकता का होना जरूरी है।

2. स्वाधिष्ठान चक्र -
यह वह चक्र लिंग मूल से चार अंगुल ऊपर स्थित है, जिसकी छ: पंखुरियां हैं। अगर आपकी ऊर्जा इस चक्र पर ही एकत्रित है, वह आपके जीवन में आमोद-प्रमोद, मनोरंजन, घूमना-फिरना और मौज-मस्ती करने की प्रधानता रहेगी। यह सब करते हुए ही आपका जीवन कब व्यतीत हो जाएगा आपको पता भी नहीं चलेगा और हाथ फिर भी खाली रह जाएंगे।
मंत्र : "वं"
कैसे जाग्रत करें : जीवन में मनोरंजन जरूरी है, लेकिन मनोरंजन की आदत नहीं। मनोरंजन भी व्यक्ति की चेतना को बेहोशी में धकेलता है। फिल्म सच्ची नहीं होती. लेकिन उससे जुड़कर आप जो अनुभव करते हैं वह आपके बेहोश जीवन जीने का प्रमाण है। नाटक और मनोरंजन सच नहीं होते।
प्रभाव : इसके जाग्रत होने पर क्रूरता, गर्व, आलस्य, प्रमाद, अवज्ञा, अविश्वास आदि दुर्गणों का नाश होता है। सिद्धियां प्राप्त करने के लिए जरूरी है कि उक्त सारे दुर्गुण समाप्त हो, तभी सिद्धियां आपका द्वार खटखटाएंगी।

3. मणिपुरक चक्र :
नाभि के मूल में स्थित रक्त वर्ण का यह चक्र शरीर के अंतर्गत "मणिपुर" नामक तीसरा चक्र है, जो दस कमल पंखुरियों से युक्त है। जिस व्यक्ति की चेतना या ऊर्जा यहां एकत्रित है उसे काम करने की धुन-सी रहती है। ऐसे लोगों को कर्मयोगी कहते हैं। ये लोग दुनिया का हर कार्य करने के लिए तैयार रहते हैं।
मंत्र : "रं"
कैसे जाग्रत करें: आपके कार्य को सकारात्मक आयाम देने के लिए इस चक्र पर ध्यान लगाएंगे। पेट से श्वास लें।
प्रभाव : इसके सक्रिय होने से तृष्णा, ईर्ष्या, चुगली, लज्जा, भय, घृणा, मोह आदि कषाय-कल्मष दूर हो जाते हैं। यह चक्र मूल रूप से आत्मशक्ति प्रदान करता है। सिद्धियां प्राप्त करने के लिए आत्मवान होना जरूरी है। आत्मवान होने के लिए यह अनुभव करना जरूरी है कि आप शरीर नहीं, आत्मा हैं। आत्मशक्ति, आत्मबल और आत्मसम्मान के साथ जीवन का कोई भी लक्ष्य दुर्लभ नहीं।

4. अनाहत चक्र
हृदय स्थल में स्थित स्वर्णिम वर्ण का द्वादश दल कमल की पंखुड़ियों से युक्त द्वादश स्वर्णाक्षरों से सुशोभित चक्र ही "अनाहत चक्र" है। अगर आपकी ऊर्जा अनाहत में सक्रिय है, तो आप एक सृजनशील व्यक्ति होंगे। हर क्षण आप कुछ न कुछ नया रचने की सोचते हैं.
मंत्र : "यं"
कैसे जाग्रत करें : हृदय पर संयम करने और ध्यान लगाने से यह चक्र जाग्रत होने लगता है। खासकर रात्रि को सोने से पूर्व इस चक्र पर ध्यान लगाने से यह अभ्यास से जाग्रत होने लगता है और "सुषुम्ना" इस चक्र को भेदकर ऊपर गमन करने लगती है।
प्रभाव : इसके सक्रिय होने पर लिप्सा, कपट, हिंसा, कुतर्क, चिंता, मोह, दंभ, अविवेक और अहंकार समाप्त हो जाते हैं। इस चक्र के जाग्रत होने से व्यक्ति के भीतर प्रेम और संवेदना का जागरण होता है। इसके जाग्रत होने पर व्यक्ति के समय ज्ञान स्वत: ही प्रकट होने लगता है। व्यक्ति अत्यंत आत्मविश्वस्त, सुरक्षित, चारित्रिक रूप से जिम्मेदार एवं भावनात्मक रूप से संतुलित व्यक्तित्व बन जाता हैं। ऐसा व्यक्ति अत्यंत हितैषी एवं बिना किसी स्वार्थ के मानवता प्रेमी एवं सर्वप्रिय बन जाता है।

5. विशुद्धि

चक्र
कंठ में सरस्वती का स्थान है, जहां "विशुद्ध चक्र" है और जो सोलह पंखुरियों वाला है। सामान्यतौर पर यदि आपकी ऊर्जा इस चक्र के आसपास एकत्रित है, तो आप अति शक्तिशाली होंगे।
मंत्र : "हं"
कैसे जाग्रत करें : कंठ में संयम करने और ध्यान लगाने से यह चक्र Iजाग्रत होने लगता है।
प्रभाव : इसके जाग्रत होने कर सोलह कलाओं और सोलह विभूतियों का ज्ञान हो जाता है। इसके जाग्रत होने से जहां भूख और प्यास को रोका जा सकता है वहीं मौसम के प्रभाव को भी रोका जा सकता है।

6. आज्ञाचक्र :
भ्रूमध्य (दोनों आंखों के बीच भृकुटी में) में "आज्ञा-चक्र" है। सामान्यतौर पर जिस व्यक्ति की ऊर्जा यहां ज्यादा सक्रिय है, तो ऐसा व्यक्ति बौद्धिक रूप से संपन्न, संवेदनशील और तेज दिमाग का बन जाता है लेकिन वह सब कुछ जानने के बावजूद मौन रहता है। "बौद्धिक सिद्धि" कहते हैं।
मंत्र : "ॐ"
कैसे जाग्रत करें : भृकुटी के मध्य ध्यान लगाते हुए साक्षी भाव में रहने से यह चक्र जाग्रत होने लगता है।
प्रभाव : यहां अपार शक्तियां और सिद्धियां निवास करती हैं। इस "आज्ञा चक्र" का जागरण होने से ये सभी शक्तियां जाग पड़ती हैं, व्यक्ति एक सिद्धपुरुष बन जाता है।

7. सहस्रार चक्र :
"सहस्रार" की स्थिति मस्तिष्क के मध्य भाग में है अर्थात जहां चोटी रखते हैं। यदि व्यक्ति यम, नियम का पालन करते हुए यहां तक पहुंच गया है तो वह आनंदमय शरीर में स्थित हो गया है। ऐसे व्यक्ति को संसार, संन्यास और सिद्धियों से कोई मतलब नहीं रहता है।
कैसे जाग्रत करें : "मूलाधार" से होते हुए ही "सहस्रार" तक पहुंचा जा सकता है। लगातार ध्यान करते रहने से यह "चक्र" जाग्रत हो जाता है और व्यक्ति परमहंस के पद को प्राप्त कर लेता है।
प्रभाव : शरीर संरचना में इस स्थान पर अनेक महत्वपूर्ण विद्युतीय और जैवीय विद्युत का संग्रह है। यही "मोक्ष" का द्वार है।
8 [9/24, 8:17 PM] ‪+91 92596 20546‬: Maa Lakshmi Kaa Ashirwad Kese Grahan Kare...

माता लक्ष्मी को कमल विशेष रूप से प्रिये है , उनका आसन कमल पर ही होता है , तथा वे हाथ में कमल को धारण किए रहती है ,कमल के पुष्प में उनका वास है ,इसी से उनका नाम कमलवासिनी भी पड़ा है l कमल के पुष्प के नीचे ही जल में कमल गट्टा होता है, उसी के बीजो से तैयार की गई माला माँ लक्ष्मी की साधनाओ में विशेष रूप से उपयोगी होती है l कमल गट्टे की माला अपने आप में ही माँ लक्ष्मी का स्वरूप होती है, जो व्यक्ति पूजा-पाठ के दौरान की माला अपने गले में धारण करता है उस पर माँ लक्ष्मी की कृपा सदा बनी रहती है।

विधान :- व्यक्ति प्रत्येक बुधवार को 108 कमलगटटे के बीज लेकर घृत के साथ एक-एक करके अग्नि में समर्पित करते हुए 108 आहुतियां देता है, उसके घर से दरिद्रता निश्चय ही समाप्त हो जाती है l

मंत्र :- ll ॐ स्वर्णावती महा भगवती कामरूपिणी मम समस्त कार्य सिद्धिं करि करि असीमित द्रव्यं प्रदायै स्थिर लक्ष्म्ये नमः ll

निम्न मंत्र बोलते हुए 108 कमल के बीजो से अग्नि में आहुति दे
इस प्रकार 21 दिन तक नित्य आहुति देने से अनुष्ठान पूर्ण होता है इस अनुष्ठान को यदि साधक जीवन में एक बार भी कर लेता है, तो आने वाली कई पीढ़िया समपर्ण बनी रहती है l उसे द्ररिद्रता व्याप्त नहीं होती...
[9/24, 8:18 PM] ‪+91 92596 20546‬: कार्य बाधानाशक उपाय
१. घर से बाहर जाते समय एक सिक्का हाथ में ले। यह सिक्का किसी भिखारी को दान देने से सभी प्रकार की कार्यबाधा हो जाती है।
२. यदि घर या व्यापार व्यवसाय में बार-बार अकारण ही बढ़ाएं आ रहे हो तो श्याम तुलसी का पौधा लगाएं तथा संध्या के समय प्रतिदिन शुद्ध घी का दीपक जलाएं। अनचाही बाधाओं से शीघ्र ही छुटकारा मिल जाएगा।
३. जब भी घर से बाहर जाएँ, नाक का जो भी स्वर चल रहा हो वही कदम सबसे पहले बाहर रखें। सफलता मिलेगी।
४. प्रतिदिन प्रातः काल गायत्री मंत्र का ग्यारह बार जप करने से कार्य की सभी रुकाप्टेन समाप्त हो जाती है।
५. प्रातः काल गणेश जी को दूर्वा अर्पित करके यदि काम पर जाएँ तो कार्य में कोई बढ़ा नहीं आती।
६. हल्दी तथा चावल को पीसकर तथा उसका घोल बनाकर प्रवेश द्वार पर ॐ लिखने से घर की सभी कार्य बढ़ाएं समाप्त हो जाती है।
७. पांच बत्ती का दीपक हर मंगलवार एवं शनिवार यदि अनुमांजी के मंदिर में जलाया जाय तो सभी प्रकार की परेशानियां दूर हो जाएँगी।
८. मंगलवार के दिन एक मिटटी के पात्र में शुद्ध शहद भरकर यदि किसी एकांत स्थान पर चुपचाप रख आये तो कार्य में आने वाली सभी बाधाएं दूर हो जाएगी।
९. यदि किसी विशेष कार्य में बाधा आ रहे हो तो प्रातः काल सीता एवं हनुमान जी के मंदिर जाएं। उनकी मूर्ति से अपनी अंगुली पर थोड़ा से सिंदूर लेकर सीताजी के सामने अपनी समस्या कहें, फिर वही सिंदूर उनके चरणों पर लगा दें , ९ दिनों में कार्य निर्विघ्न रूप से पूर्ण हो जाएगा।
१०. प्रातः काल स्नान के पश्चात दीपक जलाकर उसमे दो अखंडित लौंग डाल दे , इसके बाद घर से प्रस्थान करें। कार्य की समस्त बाधा दूर हो जाएगी।
११. कार्य में अकारण आने वाली बाधाएं दूर करने के लिए प्रतिदिन लगातार संध्या के समय श्री गणेश स्त्रोत का पाठ करें। तथा बाद में गाय को हरी घास खिलाएं। इस उपाय से कार्य में आ रही अकारण बाधा दूर हो जायेगी।
[9/24, 8:18 PM] ‪+91 92596 20546‬: परिवार के सदस्यों में झगड़े होते हों तो परिवार का
मुख्य व्यक्ति रात्रि को अपने पलंग के नीचे एक लोटा
पानी रख दे और सुबह गुरुमंत्र अथवा भगवन्नाम का
उच्चारण करके वह जल पीपल को चढ़ायें। इससे
पारिवारिक कलह दूर होंगे, घर में शांति होगी।
झाड़ू और पोंछा ऐसी जगह पर नहीं रखने चाहिए कि
बार-बार नजरों में आयें। भोजन के समय भी यथासंभव न
दिखें, ऐसी सावधानी रखें।
घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने के लिए रोज पोंछा
लगाते समय पानी में थोड़ा नमक मिलायें। इससे
नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव घटता है। एक डेढ़ रूपया
किलो खड़ा नमक मिलता है उसका उपयोग कर सकते
हैं।
घर में टूटी-फूटी अथवा अग्नि से जली हुई प्रतिमा
की पूजा नहीं करनी चाहिए। ऐसी मूर्ति की पूजा
करने से गृहस्वामी के मन में उद्वेग या घर-परिवार में
अनिष्ट होता है।
(वराह पुराणः 186.43)
50 ग्राम फिटकरी का टुकड़ा घर के प्रत्येक कमरे में
तथा कार्यालय के किसी कोने में अवश्य रखना
चाहिए। इससे वास्तुदोषों से रक्षा होती है।
किसी दुकान या प्रतिष्ठान के मुख्य द्वार पर काले
कपड़े में फिटकरी बाँधकर लटकाने से बरकत आती है।
दक्षिण भारत व अधिकांशतः दुकानों के मुख्य द्वार
पर फिटकरी बाँधने का रिवाज लम्बे समय से प्रचलित
है। .

9.  मूलांक द्वारा जाने अपना भविष्य
हमारे जन्म की तारीख ही वह दर्पण है | जिसमे हमारी जीवन का दर्पण है अत: हमारे जन्म के समय हमारे जीवन का घटनाक्रम, हमारा स्वभाव, व्यतित्व, नौकरी और स्वास्थ्य आदि निश्चित हो जाता है | ज्योतिष में नो गृह माने गए है और अंको में भी एक से नो अंक तक जेसे:-आप 10 तारीक को पैदा हुए तो मूलांक 1 हुआ इसी तरह 24 = 2+4= 6 , 28 = 2+8= 10= 1 मूलांक हुआ |
इसी तरह में 1 से लेकर 9 की तारीख तक लिख रहा हूँ |

अंक 1 :- अंक 1 सुर्य का प्रतिक होता है वे सब जो 1, 10, 19 या 28 तारीक को पैदा हुए है वे सभी नंबर 1 मूलांक वाले कहलायेगे | ये दृढ निश्चयी , अत्यंत कुशल , चुस्त , स्वाभिमानी और किसी के सामने झुकते नहीं है | ये अपने तरीके से जीवन जीना पसंद करते है एक राजा की भांति | इन्हे किसी का हस्तषेप अपने कार्य में पसंद नहीं है | सुनेगे सबकी मगर करेगे वही जो खुद की ठीक लगे | यदि कुंडली में सूर्य उत्तम स्तिथि में है तो जातक के चहरे पर सूर्य सा चमकता तेज होता है कोई भी व्यक्ति इनकी बातो से वशीभूत(attract) हो जाता है | ये व्यक्ति सबका भला चाहते है और इन्हे बदले में कुछ पाने की इच्छा नहीं रखते है | कार्य में ये जातक उच्च पद पर आसीन होते है | सरकारी जॉब लगने के अधिक सम्भावना होती है |
यदि सूर्य कुंडली में सही नहीं हो तो स्वास्थ्य की दृष्टी से इन्हें आँखों की तकलीफ , ह्दय विकार , रक्त विकार आदि होने की सम्भावना रहती है वा पेरो में भी अक्सर जलन सी रहती है गुस्सा अधिक आना पराक्रम की दृष्टी से हीन होते है ( यानि पराक्रम का आभाव होता है ) किसी से बात करने में हिचकिचाते है (confidence loose) होता है |

मूलांक 2 :- वे सभी व्यक्ति जो किसी भी महीने की 2,11,20 और 29 तारीखों में पैदा हुए है वे सभी 2 नंबर मूलांक में आते है अंक 2 का चन्द्र प्रतिक होता है | ऐसे व्यक्ति भावुक होते है वा घुमाने -फिरने के शोकिन होते है | नई-नई जगह पर इन्हे अच्छा लगता है यदि चद्रमा कुंडली मै अच्छा है तो जातक हर कार्य सोच समझ कर करता है ऐसे व्यक्तियों का स्वभाव शांत प्रविर्ति का होता है और सफ़ेद वस्तुओ,ज़ल अधिकारी वा लेखक बन सकता है | ऐसे जातक कुछ ना कुछ सोचते ही रहते है और ये कला प्रेमी वा रचनात्मक(different)कार्य करते है | यदि कुंडली में चन्द्रमा की स्थिति अच्छी नहीं है तो जातक परेशान अधिक रहता है किसी ना किसी बात को लेकर ऐसे जातक को दिमाग (mind problam)सम्बन्धी बीमारिया भी लग सकती है | ऐसे जातक को नजला,खासी,जुकाम आदि होने की सम्भावना अधिक रहती है |

मूलांक 3 :-वे सभी व्यक्ति जो किसी भी महीने की 3 , 12 , 21 और 30 तारीख को पैदा हुए है उन व्यक्तियों का मूलांक 3 होता है | इन्हें खाने-पीने और पढने का बेहद शोक होता है खाने में भी तला हुआ भोजन पसंद करते है ऐसे जातक स्वाभिमानी और ज्यादातर उच्चस्तरीय पदों पर काम करते है | हुकुम चलाना ,शासन करना इन्हे बहुत अच्छा लगता है | ये अपने जीवन में बहुत ख्याति प्राप्त करते है इनकी यादाश्त बहुत अच्छी होती है |
क्योकि ये तला खाना खाने के शोकिन होते है इसलिए इन्हें गठिया , वायु विकार , रक्तचाप सम्बन्धी रोग अक्सर लगते रहते है |

मूलांक 4 :-वे सभी व्यक्ति जो किसी भी महीने की 4 ,13 ,22 और 31 तारीख को पैदा हुए है उन व्यक्तियों का मूलांक 4 होता है | ऐसे व्यक्ति प्रखर दिमाग वाले चुस्त ,चालाक और सामने वाले को तुरंत भाप लेते है | ऐसे व्यक्ति कोई भी समस्या का समधान चुटकियो में निकल लेते है | किसी से भी अपना कार्य करवाना हो तो इनको इसे करवाने में कोई कठिनाई नहीं आती है पैसे की की दृष्टी से इनका कोई काम रुकता नहीं है क्योकि ये कही ना कही से पैसो का इंतजाम कर लेते है | स्वास्थय की दृष्टी से इनको आंख , कान, नाक और गले की तकलीफ होने की सम्भावना होती है |

मूलांक 5 :- वे सभी व्यक्ति जो किसी भी महीने की 5 , 14 और 23 तारीख को पैदा हुए है उन व्यक्तियों का मूलांक 5 होता है | ऐसे व्यक्ति खुशमिजाज, फुर्तीले और प्रखर दिमाग वाले लोग होते है इन्हें घूमना-फिरना बहुत अच्छा लगता है ऐसे व्यक्ति किसी भी मोहोल में जल्दी घुल-मिल जाते है | कोई भी बड़ा कार्य करने से पूर्व इन्हे किसी दुसरे व्यक्ति की राय की जरूरत होती है क्योकि इनमे आत्मविशवास की कमी होती है पैसे के मामले में ये काफी भाग्यशाली होते है | इनको ज्यादा सोचने की वजह से मानसिक तनाव और नींद की कमी होने की सम्भावना है |

मूलांक 6 :- वे सभी व्यक्ति जो किसी भी महीने की 6 ,15 और 24 तारीख को पैदा हुए है उन व्यक्तियों का मूलांक 6 होता है | ऐसे व्यक्ति प्रभावशाली व्यक्तित्व के होते है कोई भी व्यक्ति इनकी बातो से प्रभावित हो सकता है ये खाने-पीने , अच्छे वस्त्र पहनने के शोकिन होते है | इनका मिलाना जुलना अक्सर अपने से उच्च स्तर के लोगो में होता है | कोई भी बड़ी बात हो जाये या कोई विपरीत परिस्थिति में ये हताश नहीं होते है ऐसे हालातो का हिम्मत से जूझते है | इनको शुगर होने की सम्भावना होती है खाने के शोकिन होने के कारण इनका हजम कमजोर होता है |

मूलांक 7 :- वे सभी व्यक्ति जो किसी भी महीने की 7 ,16 और 25 तारीख को पैदा हुए है उन व्यक्तियों का मूलांक 7 होता है | ये लोग यात्रा चाहे छोटी हो या बड़ी करने के शोकिन होते है | स्वभाव से कलाकार,धार्मिक और भावुक होते है | धेर्य और हिम्मत से हर काम में जुटे रहते है | नई-नई चीजो के बारे में जानना इन्हे अच्छा लगता है | व्यवसाय में काफी सफल रहते है | खाने के मामले में सावधानी बरतनी चाहिए सर्दी में इन्हे नाक,कान,गले का ध्यान रखना चाहिए |

मूलांक 8 :- वे सभी व्यक्ति जो किसी भी महीने की 8 ,17 और 26 तारीख को पैदा हुए है उन व्यक्तियों का मूलांक 8 होता है | ऐसे व्यक्ति मेहनती और विचारशील व्यक्तितिव के होते है दिखावे से इन्हे नफरत होती है अत चुपचाप अपने कार्य शेत्र में लगे रहते है | बाहर से चाहे से कितने ही कुश क्यों ना हो परन्तु कोई ना कोई बात इन्हें खाई जाती है ये बहुत अच्छे दोस्त बनते है यदि इनकी किसी के साथ दुश्मनी है तो ये उसे कभी माफ़ नहीं करते है और उसे पूरी तरह तबाह करके ही दम लेते है बचपन से ही इन पर बहुत जिम्मेदारिया होती है जिन्हें ये बखूबी निभाते है | जीवन काल में खुशिया काम वा कार्य अधिक मिलता है | इनमे तर्क शक्ति बहुत अधिक होती है और ये सफल वकील या जज भी बन सकते है | इन्हें पित और जोड़ो के दर्द की शिकायत रहती है | सिर दर्द और मानसिक तनाव के भी शिकार हो जाया करते है |

मूलांक 9 :- वे सभी व्यक्ति जो किसी भी महीने की 9 ,18 और 27 तारीख को पैदा हुए है उन व्यक्तियों का मूलांक 9 होता है | ऐसे जातक अपने बलबूते पर जीने वाले लोग होते है सारा जीवन संघर्ष और कड़ी म्हणत से जिंदगी की ऊचाई छुते है यदि ये कोई बात ठान ले तो ये उसे पूरा करके ही रहते है किसी भी कार्य को देख कर हिचकिचते नहीं है अपने जीवन काल में ये काफी पैसा कमते है | दूसरो पर हुकुम चलाना और सत्ता में बने रहना इन्हें अच्छा लगता है | इन्हें उच्च रक्त चाप और हार्ट से सम्बंधित परेशानिया हो सकती है

10 Totke for good health /स्वास्थ्य के लिये जबरदस्त 10 टोटके
स्वास्थ्य के लिये टोटके

1) अगर परिवार में कोई परिवार में कोई व्यक्ति बीमार है तथा लगातार औषधि सेवन के पश्चात् भी
स्वास्थ्य लाभ नहीं हो रहा है, तो किसी भी रविवार से आरम्भ करके लगातार 3 दिन तक गेहूं के आटे का
पेड़ा तथा एक लोटा पानी व्यक्ति के सिर के ऊपर से उबार कर जल को पौधे में डाल दें तथा पेड़ा गाय को
खिला दें। अवश्य ही इन 3 दिनों के अन्दर व्यक्ति स्वस्थ महसूस करने लगेगा। अगर टोटके की अवधि में
रोगी ठीक हो जाता है, तो भी प्रयोग को पूरा करना है, बीच में रोकना नहीं चाहिए।

2) अमावस्या को प्रात: मेंहदी का दीपक पानी मिला कर बनाएं। तेल का चौमुंहा दीपक बना कर 7 उड़द के
दाने, कुछ सिन्दूर, 2 बूंद दही डाल कर 1 नींबू की दो फांकें शिवजी या भैरों जी के चित्र का पूजन कर, जला
दें। महामृत्युजंय मंत्र की एक माला या बटुक भैरव स्तोत्र का पाठ कर रोग-शोक दूर करने की भगवान से
प्रार्थना कर, घर के दक्षिण की ओर दूर सूखे कुएं में नींबू सहित डाल दें। पीछे मुड़कर नहीं देखें। उस दिन
एक ब्राह्मण -ब्राह्मणी को भोजन करा कर वस्त्रादि का दान भी कर दें। कुछ दिन तक पक्षियों, पशुओं और
रोगियों की सेवा तथा दान-पुण्य भी करते रहें। इससे घर की बीमारी, भूत बाधा, मानसिक अशांति
निश्चय ही दूर होती है।

3) अगर बीमार व्यक्ति ज्यादा गम्भीर हो, तो जौ का 125 पाव (सवा पाव) आटा लें। उसमें साबुत काले
तिल मिला कर रोटी बनाएं। अच्छी तरह सेंके, जिससे वे कच्ची न रहें। फिर उस पर थोड़ा सा तिल्ली का
तेल और गुड़ डाल कर पेड़ा बनाएं और एक तरफ लगा दें। फिर उस रोटी को बीमार व्यक्ति के ऊपर से 7
बार वार कर किसी भैंसे को खिला दें। पीछे मुड़ कर न देखें और न कोई आवाज लगाए। भैंसा कहाँ मिलेगा,
इसका पता पहले ही मालूम कर के रखें। भैंस को रोटी नहीं खिलानी है, केवल भैंसे को ही श्रेष्ठ रहती है।
शनि और मंगलवार को ही यह कार्य करें।

4) पीपल के वृक्ष को प्रात: 12 बजे के पहले, जल में थोड़ा दूध मिला कर सींचें और शाम को तेल का दीपक और अगरबत्ती जलाएं। ऐसा किसी भी वार से शुरू करके 7 दिन तक करें। बीमार व्यक्ति को आराम मिलना प्रारम्भ हो जायेगा।

5) घर से बीमारी जाने का नाम न ले रही हो, किसी का रोग शांत नहीं हो रहा हो तो एक गोमती चक्र ले
कर उसे हांडी में पिरो कर रोगी के पलंग के पाये पर बांधने से आश्चर्यजनक परिणाम मिलता है। उस दिन
 से रोग समाप्त होना शुरू हो जाता है।

6) यदि आपका बच्चा बहुत जल्दी-जल्दी बीमार पड़ रहा हो और आप को लग रहा कि दवा काम नहीं कर
रही है, डाक्टर बीमारी खोज नहीं पा रहे है। तो यह उपाय शुक्ल पक्ष की अष्टमी को करना चाहिये। आठ
गोतमी चक्र ले और अपने पूजा स्थान में मां दुर्गा के श्रीविग्रह के सामने लाल रेशमी वस्त्र पर स्थान दें। मां
भगवती का ध्यान करते हुये कुंकुम से गोमती चक्र पर तिलक करें। धूपबत्ती और दीपक प्रावलित करें।
धूपबत्ती की भभूत से भी गोमती चक्र को तिलक करें। ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे की 11 माला जाप

करें। जाप के उपरांत लाल कपड़े में 3 गोमती चक्र बांधकर ताबीज का रूप देकर धूप, दीप दिखाकर बच्चे के
गले में डाल दें। शेष पांच गोमती चक्र पीले वस्त्र में बांधकर बच्चे के ऊपर से 11 बार उसार कर के किसी
विराने स्थान में गड्डा खोदकर दबा दें। आपका बच्चा हमेशा सुखी रहेगा।

7) घर मे जहा पर भी पानी लीक हो रहा हो उसे तुरंत ठीक करवा लेना चाहिए. घर मे पानी का टपकता रहना योग्य नहीं कहा जाता तथा ऐसे घर के सभ्यो मे मानसिक रोग की सम्भावना बढ़ जाती है.

 8) सूर्य को सूर्योदय के समय अर्ध्य देना अत्यधिक उत्तम होता है. उस समय “ औम घृणी सूर्य आदित्याय सर्व दोष निवारणाय नमः” का ११ बार उच्चारण करने से सभी दोषों से मुक्ति मिलती है

9) संध्या काल मे साधक अगर निर्जन वातावरण मे ५ अगरबत्ती पंच तत्वों को याद कर के लगा दे तथा पूर्वजो को मदद के लिए प्रार्थना करे तो सर्व लक्ष्मी तथा स्वास्थ्य सबंधित दोषों की निवृति होती है

10) सूर्यास्त के समय अपने जल संग्रह स्थान के पास एक दीप जलने पर आकाश तथा जल स्वास्थ्य सबंधित सर्व दोषों की निवृति होती है




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