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Wednesday, 21 March 2018

Ramnavami ka rahasya

रामायण हिन्दू धर्म का महान और धार्मिक महाकाव्य है, जो अयोध्या के राजा दशरथ और उनके पुत्र प्रभु श्री राम का इतिहास बताता है। एकबार, त्रेता युग में दशरथ नामक एक राजा थे, जिनकी तीन पत्नियाँ (कौशल्या, सुमित्रा और कैकेयी) थी। उनके कोई भी संतान नहीं थी, जिसके कारण वे अयोध्या के भावी भविष्य के राजा के लिए चिन्तित रहते थे। एक दिन उन्हें महान ऋषि वशिष्ठ ने पुत्र प्राप्ति की इच्छा को पूरा करने के लिए सन्तान प्राप्ति यज्ञ करने की सलाह दी।

इस यज्ञ को करने के लिए विशेष रुप से ऋष्यशृंग को आमंत्रित किया गया। यज्ञ पूरा करने के बाद, यज्ञ देवता ने उन्हें दिव्य खीर से भरा हुआ कटोरा दिया। उन्होने कटोरे की दिव्य खीर को तीनों पत्नियों में खिला देने के लिए दिया। खीर खाने के कुछ दिनों के बाद में, सभी रानियाँ गर्भवती हो गई। चैत्र के महीने में नौंवी के दिन कौशल्या ने दोपहर के समय राम को, कैकेयी ने भरत को और सुमित्रा ने जुड़वा पुत्र लक्ष्मण और शत्रुघ्न को जन्म दिया।

रामनवमी एक धार्मिक और पारम्परिक त्योहार है, जो हिन्दू धर्म के लोगों के द्वारा पूरे उत्साह के साथ हर साल मनाया जाता है। यह अयोध्या के राजा दशरथ और रानी कौशल्या के पुत्र भगवान राम, के जन्मदिन के रुप में मनाया जाता है। भगवान राम, हिन्दू देवता, भगवान विष्णु के दशावतार में से 7वें अवतार थे। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, यह त्योहार हर वर्ष चैत्र मास (महीने) के शुक्ल पक्ष के 9वें दिन पड़ता है। रामनवमी को चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की नवमी भी कहा जाता है, जो नौ दिन लम्बें चैत्र-नवरात्री के त्योहार के साथ समाप्त होती है।

हिन्दू धर्म के लोग इसे नौ दिन के त्योहार के रुप में, पूरे नौ दिनों पर राम चरित्र मानस के अखंड पाठ, धार्मिक भजन, हवन, पारम्परिक कीर्तन और पूजा व आरती के बाद प्रसाद के वितरण आदि का आयोजन करने के द्वारा मनाते हैं। भक्त भगवान राम की शिशु के रुप में मूर्ति बनाते हैं और उसके सामने भगवान की पूजा करते हैं। जैसा कि सभी जानते हैं कि, भगावन विष्णु के 7वें अवतार भगवान राम थे और उन्होंने सामान्य लोगों के बीच में उनकी समस्याएं हटाने के लिए जन्म लिया था। लोग अपनी समस्याओं को दूर करने और बहुत अधिक समृद्धि व सफलता प्राप्त करने के उद्देश्य से मन्दिरों और अन्य धार्मिक स्थलों को अपने पारम्परिक अनुष्ठानों करने के लिए सुसज्जित करते हैं और प्रभु को फल व फूल अर्पण करते हैं। वे सब इस दिन वैदिक मंत्रों का जाप, आरती और अन्य बहुत से धार्मिक भजनों का गान करने के लिए मन्दिरों या अन्य धार्मिक स्थलों पर एकत्रित होते हैं।

बहुत से भक्त इस त्योहार को पूरे नौ दिनों का उपवास रखने के द्वारा मनाते हैं और नवरात्री के अन्तिम दिन उन्हें पूरा आशीर्वाद मिलता है। दक्षिणी भारतीय लोग इस दिन को भगवान राम और माता सीता की शादी की सालगिरह के रुप में मनाते हैं। दक्षिणी क्षेत्र में नवरात्री मनाने के लिए सभी मन्दिर सजाए जाते हैं। यद्यपि, वाल्मिकी रामायण के अनुसार मिथला और अयोध्या के लोग शादी की सालगिरह को विवाह पंचमी पर मनाते हैं। हजारों श्रद्धालुओं के द्वारा अयोध्या (उत्तर प्रदेश), सीतामढ़ी, बिहार, रामेश्वरम, तमिलनाडु, भद्राचलम, आंध्रप्रदेश आदि, स्थलों पर राम नवमी के भव्य समारोह का आयोजन किया जाता है। कुछ स्थानों (जैसे: अयोध्या, वनारस, आदि) पर, भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की रथ यात्रा अर्थात् जूलुस (शोभा यात्रा) को हजारों श्रद्धालुओं के द्वारा पवित्र नदी गंगा या सरयू में पवित्र डुबकी लेने के बाद निकाला जाता है।

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